Affiliation No: - 2132980 | Period: - 01.04.2020 to 31.03.2023 | School Code: - 71048 | Affiliated till Senior Secondary

Sanskrit Diwas celebrated at Jaipuria

Sanskrit Diwas celebrated at Jaipuria

 706 total views

संस्कृतं नाम दैवी वाक् व्याख्याता महर्षिभिः

आज वर्चुअल मंच के माध्यम से संस्कृत दिवस का आयोजन किया गया। जिसमें छात्र-छात्राओं की छिपी प्रतिभा उजागर हुई।
माँ सरस्वती स्तुति के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। जिसे कक्षा अष्टम् स की सौम्या पाण्डे और कृष्णा पाण्डे ने प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के सुचारु संचालन मे उद्घोषकों वानी शाह, सौम्या पाण्डे व वत्सल शुक्ला ने मंत्रमुग्ध कर दिया।
तदुपरांत संस्कृतभाषायाः प्राचीना अर्वाचीना च संकरः का प्रस्तुतीकरण
कक्षा छः के वत्सल,सना शर्मा,आद्या मिश्रा,अनन्या एवं अपूर्व विष्ट के द्वारा किया गया।
चतुरः काकः कक्षा अष्टम् स के अदम्य श्रीवास्तव द्वारा प्रस्तुत किया गया। जिसमें एक सुंदर संदेश निहित था।
संस्कृतेव संस्कृति: (माइन क्राफ्ट) कक्षा सात के अजितेश एवं तन्मय के द्वारा निर्मित किया गया। छात्रों द्वारा संस्कृत श्लोकों का सुन्दर वाचन किया गया।
मूर्ख सेवकः न रक्षणीयः (कठपुतली प्रदर्शन) कक्षा अष्टम् अ के प्रखर त्रिपाठी ने प्रस्तुत किया जो प्रभावपूर्ण एवं शिक्षाप्रद था।
कक्षा सात स के कोविद शर्मा ने शिवोऽहं प्रस्तुत करके श्रावण मास मे भोलेनाथ का तादात्म्य स्थापित कर दिया।
छात्रों के संस्कृत भाषा के श्रेष्ठ कार्य को प्रदर्शित किया गया जिसमे उनका संस्कृत के प्रति रुझान दृष्टिगोचर हुआ।
कक्षा अष्टम् ब के अभिनव मजूमदार एवं तोषित राय ने संस्कृत साहित्य के इतिहास को बड़ी सुन्दरता से प्रस्तुत किया। संस्कृत के भावी उत्थान के विषय में संस्कृत अध्यापिका श्रीमती अनुभा बाजपेई ने अपने सारगर्भित विचार व्यक्त किए।
छात्र छात्राओं द्वारा अंतिम प्रस्तुति के रुप में संस्कृत नृत्य प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन सभी की भावाभिव्यक्ति दर्शनीय थी।
श्लोक वाचन का वीडियो बनाने का कार्य कक्षा नवम् की भार्गवी पाल ने किया।
कार्यक्रम के सफल आयोजन केबाद श्रीमती शिखा सक्सेना ने
सभी आगन्तुकों का आभार व्यक्त किया।
इसके उपरांत प्रधानाचार्या श्रीमती पूनम कोचिट्टी जी ने कार्यक्रम की सराहना की एवं अपने प्रेरणापूर्ण शब्दों से सभी का उत्साहवर्धन किया।
हेडमास्टर श्री पंकज राठौर जी ने उद्घोषकों की सराहना की कि उन्होंने संस्कृत की गरिमा को बनाए रखा।उन्होंने सरस्वती वंदना को हृदयस्पर्षी बताकर विद्यार्थियों का उत्साह वर्धन किया|

Share this post


Enquire Now
close slider